नीतीश जी ‘लव-कुश’ फ़ॉर्मूले के सहारे लालू प्रसाद के दुर्ग भेदने में सफ़ल हुए थे
एक तरफ कुर्मी समाज अपने चरम सीमा पर पहुंच गया, वहीं कुशवाहा समाज अपने ठगा और पिछलग्गू मानता है। 2005 से कुशवाहा वोट नीतीश कुमार के साथ रहा है।
एक तरफ कुर्मी समाज अपने चरम सीमा पर पहुंच गया, वहीं कुशवाहा समाज अपने ठगा और पिछलग्गू मानता है। 2005 से कुशवाहा वोट नीतीश कुमार के साथ रहा है।
नेताओं को बिहार और बिहारी की चिंता नहीं है, चिंता तो मात्र अपनी कुर्सी की है। बिहार की बेटियों का कीमत तय करना कितनी शर्मसार करने वाली बात है।
वर्ष 2025 का अस्तित्व अब कैलेण्डर में कैद हो गया। ---नूतन के स्वागत् में हम पुरातन को भूलना चाहते हैं। पर, ---क्या अतीत को मिटानाआसान है?
पाटलिपुत्र सीट पर संसदीय चुनाव में RJD उम्मीदवार मीसा भारती के जीत में नागेंद्र कुशवाहा ने अहम् भूमिका निभाई थी।
'माँ का अपमान नहीं सहेगा बिहार।' ' माँ का अपमान कॉंग्रेस की पहचान।' बिहार और नारीशक्ति अपमान का जवाब जरूर देगी।
विधायक रीतलाल यादव के ठिकानों पर 200 की संख्या में एसटीएफ और कमांडों के साथ रंगदारी माँगने तथा संगठित अपराध की धाराओं में छापेमारी।
पीएम मोदी की नई कैबिनेट में की नई सोशल इंजीनियरिंग क्या है? देश में लगातार तीसरी बार मोदी सरकार का आगाज हो गया है। बीते शाम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति…
दिलचस्प है कि गिरफ्तारी के पांच दिन बाद ही शरथ रेड्डी की कंपनी अरविंदो फार्मा ने 5 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे और भाजपा को पहुंचा दिया।
लालू प्रसाद की राजनीति को खिसकते और निष्प्रभावी होते तो देखते हैं, मगर 5 दशकों की राजनीति में उन्हें टूटते-बिखरते नहीं देखा।
लालू प्रसाद को पुनः अध्यक्ष बनने से भाजपा नेता अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। सुशील मोदी, अश्विनी चौबे, गिरिराज सिंह के पेट में दर्द होने लगा है।