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Hamari Aawaj Aap Tak

गुण-दोष की विवेचना से इतर, आज की तिथि में अनंत सिंह बिहार के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं। उतना बड़ा जनाधार किसी के पास नहीं है। जेडीयू ने अनंत सिंह को किनारा किया तो जनसुराज बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा। नीरज कुमार की हार हुई तो अनंत सिंह निर्णायक चेहरा बनकर उभरेंगे। बहरहाल, बाहुबली तो कई हुए, लेकिन अनंत सिंह जनाधार के मामले में बेताज बादशाह हैं.

यह भी तय है कि नीरज कुमार की हार ही अनंत कुमार की जीत होगी। अनुज सिंह की जीत तो उनका परचम लहरा देगी, लेकिन नीरज कुमार की हार ही अनंत सिंह की बड़ी जीत होगी।

जेडीयू को अनंत सिंह को दरकिनार करने से पहले एक सौ बार सोचना होगा। आज की तिथि में किसी भी दल के किसी भी नेता के पास अनंत सिंह जैस व्यक्तिगत जनाधार नहीं है। प्रशांत किशोर उनके जनाधार का लाभ लेने की जुगत लगाए बैठे हैं। जेडीयू ऐसा रिस्क नहीं लेना चाहता।

अनंत सिंह की लोकप्रियता बाहुबली होने का प्रतिफल नहीं है। उनकी स्पष्टवादिता और अक्खड़पन ही उनके जनाधार का आधार है। जनता को परेशान किए बिना “फैसला ऑन स्पॉट” या कार्यों की संपन्नता की हामी या इनकार उनकी पहचान रही है।

यह भी साफ है कि उन्हें राजनीति में आमंत्रित किया गया और नीतीश कुमार की बाढ़ संसदीय क्षेत्र से जीत अनंत सिंह के समर्थन का प्रतिफल था। उन्होंने दोस्ती की मिसाल पेश की है और जाति से ऊपर उठकर दोस्तों के प्रति वफादारी निभाई है।

उनके कई अवगुण हो सकते हैं, लेकिन लोगों की मानें तो अपने भाई की हत्या के प्रतिशोध में उन्होंने हिंसक मार्ग अपनाया था। उनके भाई का हत्यारा भी भूमिहार था। इसलिए बाद के दौर में भूमिहारों के बीच कई हिंसक घटनाएँ हुईं।

महिलाओं के साथ छेड़खानी के मामले में पुटुस यादव के खिलाफ त्वरित कार्रवाई में उनका नाम आया। हाल के दिनों में उन्होंने दुष्कर्म या छेड़खानी करने वालों की हत्या को सही ठहराया।

अनंत सिंह किसी भी मामले में अपने निकटवर्ती को भी दोषी ठहराने से नहीं चूकते। उसे सबों के सामने फटकारने और उसके खिलाफ निर्णय सुनाने से परहेज नहीं करते। उन्होंने कभी जाति की बात नहीं की, जनता को भगवान से कम नहीं कहा। उनकी बैठकी या सभाओं में कोई विशेष कुर्सी नहीं दिखी, किसी भी जाति के व्यक्ति के साथ चौकी या बेड पर बैठने में कोई फर्क नहीं दिखा।

स्थानीय जनसंपर्क, काम कराने की छवि, स्पष्टवादिता, व्यक्तिगत निष्ठा और जातिगत सीमाओं से बाहर दिखने वाला व्यवहार निर्णायक रहा है। आज की तिथि में जनता का बाहुबलियों की ओर झुकाव भी बढ़ा है। लोग उसे ही आइकन मानने लगे हैं।