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Hamari Aawaj Aap Tak

देश में अराजकता बढ़ाने का प्रयास तो नहीं ? क्रोनोलॉजी समझें …

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 5/9/2026 को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर विपक्ष और अपने आलोचकों पर तीखा तंज कसा था। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा था कि उन्होंने 15 अगस्त को लाल किले से ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करके एक तरह की ‘होम्योपैथिक गोली’ दी थी। जैसे ही यह गोली पड़ी तो सारे ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता वाले लोग खुलकर बाहर आ गए।

पीएम मोदी द्वारा ‘दिमाग़ी नक्सल’ पर दिए बयान का अनुशरण करने की बात स्वतंत्र भारद्वाज भी बोल चुका है

दरअसल, SRCC जैसे नामी कॉलेज के शताब्दी समारोह में, किसी को उम्मीद रही होगी कि प्रधानमंत्री शिक्षा, नौकरियों, छात्रों पर असर डालने वाली मौजूदा चुनौतियों और अगले 20 सालों में भारत को अलग पहचान दिलाने के लिए किए जा रहे कामों पर बात करेंगे। इसके बजाय, उन्होंने “दिमागी नक्सल” जैसी बेतुकी बातें कहीं।

पीएमओ या बीजेपी ने स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा मोदी जी को भाई बताने पर खंडन नहीं किया है, जबकि, चिराग पासवान ने खंडन किया

स्वतंत्र भारद्वाज नामक आतंकवादी, जिसने ख़ुद को मोदी जी का भाई बताया था, की अदालती सुनवाई ने सबको हैरान किया है। 5 सितंबर 2026 को संपन्न सुनवाई के दौरान अराजक तत्व को एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।

इस ऑनलाइन और वर्चुअल सुनवाई से सभी दंग हैं। उसे प्रत्यक्ष रूप से कोर्ट रूम में पेश करने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये जज के सामने पेश किया गया। बहाना शनिवार को अदालती छुट्टी का बनाया गया। चुनांचे, पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के आवास पर विशेष ऑनलाइन व्यवस्था कर सुनवाई पूरी की गई।

अराजक-असमाजिक की ऑनलाइन कोर्ट सुनवाई पर उठ रहे सवाल

इस ऑनलाइन सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर पीड़िता (नाबालिग कार्यकर्ता निशू आज़ाद) के वकील ऋषभ रंजन ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अनुसूचित जाती से ताल्लुक़ रखने वाली पीड़िता के वकील और उनकी लीगल टीम कोर्ट परिसर में सुनवाई शुरू होने का इंतजार कर रहे थे।

इसी दौरान उन्हें पता चला कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘लीगल एड काउंसिल’ को जोड़कर जज के निवास स्थान से ही आरोपी की ऑनलाइन पेशी करवा दी गई। पीड़ित पक्ष को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की हवा तक लगने नहीं दी। वकीलों ने सवाल उठाया कि इतने गंभीर मामले में दिल्ली पुलिस ने केवल एक दिन की ही पुलिस रिमांड क्यों मांगी…