
जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान BJP के द्वारा गुंडे भेजे गए थे ये बात एकदम साफ हो गई। स्वतंत्र भारद्वाज नामक युवक ने यहां तक दावा किया कि उसने प्रोटेस्ट करने वालों पर हमले के लिए दिल्ली पुलिस का डंडा और जूता तक इस्तेमाल किया।
कितना दुखद है ये देखना कि कैमरे के सामने ठहाके लगाता एक चेहरा और बैकग्राउंड में कराहती हमारी न्याय व्यवस्था—स्वतंत्र भारद्वाज का वायरल वीडियो किसी भी संवेदनशील नागरिक की रूह कंपा देने के लिए काफी है। जिस देश की पहचान बाबा साहेब के संविधान और कानून की बराबरी से है, वहां एक बुजुर्ग के लहूलुहान सिर और 60 टांकों की बर्बरता पर सीना ठोककर तालियां पीटी जा रही हैं। यह सिर्फ एक हिंसक वारदात का कबूलनामा नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है।
एक बेबस बुजुर्ग बाप को मरणासन्न हालत में एम्बुलेंस में छोड़ देने वाला शख्स आज खुलेआम हंसते हुए हत्या के प्रयास (धारा 307) की नुमाइश कर रहा है। उससे भी ज्यादा खौफनाक और घिनौना उसका यह दावा है कि सत्ता और सियासत उसकी जेब में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चिराग पासवान और भाजपा नेता कपिल मिश्रा के नाम की आड़ लेकर वह कानून को ललकार रहा है कि ‘एक फोन’ पर पुलिस की लाठियां झुक गईं और हथकड़ियां खुल गईं।

यदि सत्ता की छांव में पलते ऐसे गुंडे खुलेआम अपराध का उत्सव मनाएंगे और कानून तमाशबीन बना रहेगा, तो इंसाफ की चौखट पर माथा टेकने वाली आम जनता का भरोसा हमेशा के लिए टूट जाएगा। यह दिल्ली पुलिस और अदालतों की साख की अंतिम परीक्षा है।

इस वायरल वीडियो का अविलंब स्वतः संज्ञान लेकर स्वतंत्र भारद्वाज को जेल की सलाखों के पीछे धकेला जाए। अगर आज यह रसूखदार गुंडागर्दी नहीं थमी, तो तय मानिए कि इस मुल्क में इंसाफ जिंदा नहीं, सिर्फ एक खोखला ढोंग बनकर रह गया है।

बीजेपी सरकार ने देश में अपराधियों को तो संरक्षण देती ही हैं, साथ में पुलिस का भी अपराधीकरण कर दिया। आलम ये है कि सड़क छाप गुंडों पर पुलिस एक्शन तक लेने में डरती है। यही वजह है कि आज हम निशु और उनके परिजनों को समर्थन देने संसद मार्ग थाना आए हैं।
निशु आजाद स्कूल में पढ़ती हैं और दलित समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाती हैं। निशु ने जंतर-मंतर के आंदोलन में हिस्सा लिया और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात को रखा, जहां BJP राइट विंग के हिंसक लोगों ने उनके पिता से मारपीट की। मारपीट करने वाले का नाम है- गुंडा स्वतंत्र भारद्वाज, जिसका बड़े-बड़े चैनल इंटरव्यू कर रहे हैं।
अपने इंटरव्यू में स्वतंत्र भारद्वाज बड़ी ही बेशर्मी से अपने हिंसक किस्से सुना रहा है। कह रहा है मोदी और चिराग पासवान उसके भाई है, इसलिए पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। वह दलित समाज के लिए अपमानसूचक शब्द का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन इसके खिलाफ किसी धारा में कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा।
इसके खिलाफ आज हम भी दिल्ली में धरना पर बैठे और बीजेपी की गुंडागर्दी का प्रतिकार किया। समाज में नफरत का जहर बोकर देश को बर्बाद करने का काम गोडसे के लोग कर रहे हैं, जो आज के समय में काले अंग्रेज हैं ।
मंत्रियों को लड़कियों की Supply होती है?
स्वतंत्र भारद्वाज पॉडकास्ट में दावा कर रहा है कि मंत्रियों के यहां लड़कियां सप्लाई होती हैं। दिल्ली के हौज खास से कम उम्र की लड़कियां मंत्रियों के यहां सप्लाई होती हैं। और यह इस बात को अच्छे से जानता है। इसने पॉडकास्ट के एक हिस्से में यह भी बताया कि इसकी दोस्ती कपिल मिश्रा और चिराग पासवान जैसे मंत्रियों से है। यह मोदी को भी अपना बड़ा भाई बता रहा है।

अब इस आदमी से मैं पूछना चाहूंगा की दिल्ली में किस पार्टी की सरकार है? केंद्र में किस पार्टी की सरकार है? स्पष्ट तौर पर उत्तर है कि भाजपा की सरकार है। तो किन मंत्रियों के यहां लड़कियां सप्लाई होती हैं? अगर खुलकर तुम पॉडकास्ट में यह दावा कर रहे हो कि मंत्रियों के यहां लड़कियां सप्लाई होती है वह भी हौज खास से तो स्पष्ट है कि भाजपा के मंत्रियों के यहां ऐसा होता है।

…और यदि भाजपा के मंत्रियों को लगता है कि ऐसा नहीं होता है तो स्वतंत्र भारद्वाज को तुरंत गिरफ्तार करके इससे पूछताछ की जाए और अगर ऐसा होता है तो मंत्रियों पर कार्यवाही की जाए।
































