
धर्म के कई कथित बड़े-बड़े ठेकेदार नेपाल में मुक्तिनाथ के तट पर इस पत्थर के पीछे पड़े हैं। कोई इसे 17 करोड़ साल पहले का बता रहा है तो कोई शालिग्राम। असल में मई 2026 को नेपाली संतराशो ने इस पर अपना हुनर बिखेरा है। आस्था झूठी, काल्पनिक कहानियों पर हो सकती है, लेकिन विज्ञान झूठ के सहारे नहीं चलता।
दोनों तस्वीरों और 29 अगस्त 2026 तक उपलब्ध ताज़ा नेपाली रिपोर्टों/फैक्ट-चेक को मिलाकर देखा है। इन दोनों तस्वीरों को सोशल मीडिया पर एक ही घटना—“नेपाल की बाढ़ में 31 टन का प्राचीन शालिग्राम मिलने”—से जोड़कर फैलाया जा रहा है, लेकिन यह दावा भ्रामक है।




1. पहली तस्वीर — बाढ़ के मलबे में दिखाई दे रहा विशाल शिलाखंड
पहली तस्वीर में बाढ़/मलबे से घिरे क्षेत्र में एक बहुत बड़ा, धूसर रंग का प्राकृतिक शिलाखंड दिखाई देता है। उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में इसकी पहचान 31 टन के शालिग्राम के रूप में प्रमाणित नहीं हुई है। नेपाल में 26 अगस्त 2026 की भीषण बाढ़ वास्तव में ग्लेशियर/बर्फ-चट्टान के बड़े हिस्से के टूटने और उसके बाद आए अत्यंत शक्तिशाली मलबा-प्रवाह से जुड़ी थी। इस आपदा में पानी के साथ भारी मात्रा में चट्टान, मिट्टी और मलबा बहा था। इसलिए पहली तस्वीर को देखकर यह कहना कि बाढ़ ने कोई “31 टन का प्राचीन शालिग्राम” बाहर निकाल दिया—अभी प्रमाणित नहीं है।
2. दूसरी तस्वीर — 22 फीट ऊँची शालिग्राम-आकृति की मूर्ति
दूसरी तस्वीर की पहचान काफी स्पष्ट है। यह मुस्तांग जिले के जोमसोम (Jomsom), वार्ड-4, घरपझोंग ग्रामीण नगरपालिका में कालीगंडकी नदी के किनारे बनाई गई लगभग 22 फीट (6.7 मीटर) ऊँची शालिग्राम-शिला की प्रतिकृति/कलात्मक मूर्ति है।
यह प्राकृतिक रूप से बाढ़ के बाद निकला हुआ पत्थर नहीं है
अप्रैल–मई 2026 में 15 दिन की मूर्तिकला कार्यशाला हुई। 36 से अधिक मूर्तिकारों ने कालीगंडकी के किनारे पड़े बड़े पत्थरों से लगभग 18 कलाकृतियाँ बनाईं। उनमें यह विशाल शालिग्राम-आकृति भी शामिल थी। इसलिए तस्वीर में दिखाई देने वाला सर्पिल/चक्र जैसा निशान तराशकर बनाया गया कलात्मक रूप है।
फिर “31 टन का शालिग्राम” वाली बात कहाँ से आई?
यहीं सबसे बड़ा भ्रम है। 2026 में वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि “मुक्तिनाथ के पास बाढ़ के बाद 31 टन का दुनिया का सबसे बड़ा शालिग्राम मिला।” फैक्ट-चेक में यह दावा गलत/भ्रामक पाया गया है। वायरल फोटो वास्तव में जोमसोम की 22 फीट ऊँची प्रतिकृति की है।
दिलचस्प बात यह है कि 31 टन वाले शालिग्राम की वास्तविक घटना अलग है—2023 में नेपाल से 31 टन और 15 टन के दो शालिग्राम पत्थर अयोध्या लाए गए थे। संभवतः इसी पुरानी जानकारी को 2026 की नेपाल बाढ़ और जोमसोम की नई तस्वीर के साथ जोड़कर नया वायरल दावा बना दिया गया।
असली बड़ा प्राकृतिक शालिग्राम भी नेपाल में है
नेपाल में वास्तव में एक विशाल प्राकृतिक शालिग्राम सेतीबेनी (Setibeni) में मौजूद है, जहाँ कालीगंडकी और सेती नदियाँ मिलती हैं। इसे नेपाल में अत्यंत महत्वपूर्ण प्राकृतिक शालिग्राम शिला माना जाता है। Kathmandu Post और कुछ नेपाली स्रोत इसे एशिया/विश्व का सबसे बड़ा बताते हैं। लेकिन यह जोमसोम वाली दूसरी तस्वीर नहीं है। जुलाई 2026 में भारी बारिश के दौरान सेतीबेनी की यह प्राकृतिक शिला बाढ़ के पानी में डूब भी गई थी।

एक और बड़ा वायरल झूठ: “4000 करोड़ वर्ष पुराना”
कुछ पोस्ट इस शिलाखंड को “4000 करोड़ वर्ष पुराना” बता रही हैं। यह दावा सीधे वैज्ञानिक तथ्यों से टकराता है। पृथ्वी की आयु लगभग 454 करोड़ वर्ष मानी जाती है; इसलिए 4000 करोड़ वर्ष पुराना पृथ्वी का कोई पत्थर होना ही संभव नहीं है। शालिग्राम से जुड़े अमोनाइट जीवाश्म वास्तव में करोड़ों वर्ष पुराने हो सकते हैं, लेकिन किसी वायरल तस्वीर के आधार पर उसकी निश्चित उम्र बताना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।
































