स्वाधीनता संग्राम संस्मरण : जब अंग्रेजी टुकड़ी खुजलाहट का शिकार बनी
गोरे जासूसों को भनक लग गयी। अंग्रेजों ने नदी की तरफ चर रहे तीन-चार गदहों को गोली मार दी। टोकरी में रखे ओल को फल समझकर उस पर टूट पड़े।
गोरे जासूसों को भनक लग गयी। अंग्रेजों ने नदी की तरफ चर रहे तीन-चार गदहों को गोली मार दी। टोकरी में रखे ओल को फल समझकर उस पर टूट पड़े।
यह सच है कि बागियों के योगदान को आधुनिक इतिहास में नकारा गया। हर वर्ष का मेला नहीं नसीब में उनके, बेठिकाने जिनका मजार है।
यह सच है कि बागियों के योगदान को आधुनिक इतिहास में नकारा गया। हर वर्ष का मेला नहीं नसीब में उनके, बेठिकाने जिनका मजार है।
गोरे जासूसों को भनक लग गयी। अंग्रेजों ने नदी की तरफ चर रहे तीन-चार गदहों को गोली मार दी। टोकरी में रखे ओल को फल समझकर उस पर टूट पड़े।
यह सच है कि बागियों के योगदान को आधुनिक इतिहास में नकारा गया। हर वर्ष का मेला नहीं नसीब में उनके, बेठिकाने जिनका मजार है।