
रिशु श्री को लेकर इन दिनों बिहार की राजनीति और नौकरशाही में व्यापक चर्चा है। उन पर सरकारी ठेकों में हेरफेर, प्रभावशाली अधिकारियों से कथित सांठगांठ और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों की जांच चल रही है।
ED की जांच रिपोर्ट में रिशु श्री को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। आरोप है कि वह सिर्फ टेंडर मैनेज नहीं करता था, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम को अपने कब्जे में कर लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, वह अधिकारियों की पोस्टिंग से लेकर टेंडर फैसलों तक में दखल देता था। जांच में दावा किया गया है कि रिशु श्री की पकड़ कई विभागों में मजबूत थी। वह तय करता था कि किस विभाग में कौन सचिव बनेगा। और किस शहर में किसे नगर आयुक्त की जिम्मेदारी मिलेगी। आरोप यह भी है कि कई IAS अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी उसकी भूमिका रही है।

ED और बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) द्वारा गिरफ़्तार किए गए ठेकेदार रिशु श्री
बिहार में सरकारी ठेकों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के बीच ठेकेदार रिशु श्री का नाम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से चर्चा में आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई के बाद यह मामला केवल एक ठेकेदार तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सरकारी विभागों, नौकरशाहों और ठेका प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करने लगा है।
कौन हैं रिशु श्री?
रिशु श्री बिहार के विभिन्न सरकारी विभागों में ठेके और सब-कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े कारोबारी माने जाते हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार उनकी कंपनियां जल संसाधन, भवन निर्माण, शहरी विकास, स्वास्थ्य तथा अन्य विभागों में कार्यरत रही हैं। मीडिया रिपोर्टों में उन्हें कभी-कभी “टेंडर किंग” के रूप में भी उल्लेखित किया गया है, क्योंकि उन पर बड़े सरकारी ठेकों को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है।
जांच एजेंसियों के आरोप
विशेष निगरानी इकाई (SVU) और ED का आरोप है कि रिशु श्री ने कुछ सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में अनियमित तरीके से लाभ प्राप्त किया। जांच में यह भी दावा किया गया है कि सरकारी ठेकों के बदले कथित रूप से अधिकारियों को लाभ पहुंचाया गया और कमीशन आधारित नेटवर्क संचालित किया गया।
ED की जांच के अनुसार रिशु श्री से जुड़े परिसरों पर बिहार, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली सहित कई स्थानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से नकदी, डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद होने का दावा किया गया।
हालिया गिरफ्तारी और छापेमारी
मई 2026 में SVU ने पटना के मिथापुर स्थित आवास पर लंबी छापेमारी के बाद रिशु श्री को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार तलाशी के दौरान नकदी, सोने-चांदी और हीरे के आभूषण, जमीन खरीद से संबंधित दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन दस्तावेजों की फोरेंसिक और वित्तीय जांच की जा रही है।
अफसरों को विदेश घुमाया, टेंडर लिया; 265 करोड़ की प्रॉपर्टी बनाईः सचिव से लेकर नगर आयुक्त की पोस्टिंग मैनेज कराता था रिशु; ED की जांच में खुलासा
टेंडर मैनेज करने के लिए रिशु श्री अलग-अलग विभागों में सचिव से लेकर नगर आयुक्त तक की पोस्टिंग मैनेज कराता था। ED जांच की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिशु श्री राज्य के IAS अधिकारियों को अपनी उंगलियों पर नचाता था
मामले का सबसे चर्चित पहलू कुछ IAS अधिकारियों के साथ कथित संबंधों का है। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि सरकारी ठेकों के बदले कुछ अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्राओं एवं अन्य खर्चों का वहन किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
कानूनी स्थिति
रिशु श्री के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) सहित विभिन्न धाराओं के तहत जांच चल रही है। इससे पहले भी उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर अदालतों में कानूनी प्रक्रिया चली है। जांच एजेंसियां मामले को बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क से जोड़कर देख रही हैं, जबकि अंतिम सत्य न्यायालय और जांच प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद ही स्पष्ट होगा।































