आजकल ‘यादव-सवर्ण एकता’ की बात सुनने को मिल रही है। यादव और भूमिहार समाज के लड़के कह रहे की आरा-बक्सर MLC उपचुनाव में जो जीत हुआ है वो सवर्ण एकता का देन है। अगर सवर्ण-यादव एकता है तो मनोज उपाध्याय को जो 636 वोट मिला वो किसका मिला? हां, मानते हैं सुधाकर सिंह और अरुण यादव का वो प्रभाव है कि कुछ सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों का वोट राजद को मिला था। शाहाबाद का समीकरण थोड़ा अलग है। लेकिन एक प्रतिनिधियों और धनबल वाले चुनाव जीत कर आप नए समीकरण की बात कर रहे हैं, ये हजम नहीं हो रहा।

आप याद करिए 2020 का विधानसभा चुनाव। चिराग़ अलग, उपेंद्र कुशवाह अलग। …और उस समय शाहाबाद में राजद को भयंकर फायदा हुआ था। 22 में से 20 पर एकतरफा जीत हुआ था। फिर आते हैं लोकसभा 2024 में पवन सिंह और उपेंद्र का झोल उसका इंपैक्ट ये हुआ कि जो महागठंधन 4 लोकसभा जीता है, उसमें 3 शाहाबाद से ही है। फिर 2025 विधासभा में NDA पूरी तरफ एकजुट और महागठबंधन का सुपड़ा साफ 22 में से 19 NDA जीत लिया।
तो शाहाबाद को समझना बाहरी लोगों के लिए मुश्किल है। ऊपर-ऊपर मत देखिए। वहां NDA के कैंडिडेट से लोग नाराज थे इसलिए निर्दलीय को वोट दे दिया। अगर वो निर्दलीय नहीं खड़ा हुआ रहता तो आज परिणाम कुछ और होता। NDA से नाराजगी का वोट निर्दलीय मनोज उपाध्याय को मिला न कि राजद के सोनू राय को।
ठीक है अच्छी बात है सवर्ण-यादव या जो भी नया समीकरण बनाइए, लेकिन किसी से बिगाड़ करके? दलित, सवर्ण, पिछड़ा, अतिपिछड़ा सब NDA के साथ हैं लेकिन वो लोग हल्ला नहीं करते। कुछ लोग जातिवादी कुंठा से ग्रसित हैं। उनकी नजर में जो भी एनकाउंटर हुए, उनके जाति के ही हुए।
सम्राट चौधरी पहले गृह मंत्री बने। फिर, मुख्यमंत्री बने। इस दौरान जितने एनकाउंटर हुए हैं, उनमें मारा गया सबसे बड़ा अपराधी कुशवाहा जाति का ही था। नाम: प्रिंस कुशवाहा उर्फ अभिजीत उर्फ चश्मा। 2 लाख रुपये का इनाम था। न्यायिक हिरासत से भागा था। देश भर में सोना लूटता था। बिहार के एक मंत्री की हत्या की योजना भी कर रहा था। पहले पुलिस पर भी गोली चलाई थी। इस प्रिंस कुशवाहा को 6 फरवरी, 2026 को हाजीपुर में एनकाउंटर में ढेर किया गया। पिता ने बेटे की लाश लेने से यह कहकर मना कर दिया कि बेटा अपराधी था, उसके साथ पुलिस ने ठीक ही किया।
































