
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान परिषद की नौ रिक्त हो रही सीटों तथा एक उपचुनाव के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। अधिसूचना 1 जून को जारी होगी, नामांकन 8 जून तक दाखिल किए जाएंगे, 9 जून को जांच होगी और 11 जून तक नाम वापसी की प्रक्रिया चलेगी। मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा तथा उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी।
यह चुनाव सामान्य नहीं माना जा रहा है, क्योंकि इसके परिणाम बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की अंदरूनी रणनीति, शक्ति संतुलन और भविष्य की दिशा तय करने वाले संकेत भी देंगे।
किन नेताओं का कार्यकाल हो रहा समाप्त?
जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें सम्राट चौधरी, भगवान सिंह कुशवाहा, डॉ. कुमुद वर्मा, गुलाम गौस, मोहम्मद फारूक, सुनील कुमार सिंह, भीष्म साहनी, संजय प्रकाश मयूक तथा समीर कुमार सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा।
NDA की संख्या शक्ति सबसे बड़ी ताकत
विधानसभा में एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है। इसी कारण राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दस में से आठ सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है। भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा तेज है। राजनीतिक गलियारों में जिन संभावित नामों की चर्चा सबसे अधिक हो रही है, उनमें दीपक प्रकाश, निशांत कुमार, रोहित चौधरी तथा राजीव कुमार सिंह जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को भी एक सीट मिलने की संभावना पर चर्चा जारी है।
सबसे बड़ा सवाल : नवमी-दसवीं सीट पर किसका दांव?
राजनीतिक जानकारों की नजर अब उस सीट पर है जहां मुकाबला रोचक हो सकता है। विपक्षी गठबंधन के सामने यह फैसला महत्वपूर्ण होगा कि वह किसी पुराने कार्यकर्ता, सामाजिक समीकरण वाले चेहरे या किसी प्रभावशाली उम्मीदवार पर दांव लगाता है। बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव हमेशा केवल गणित का खेल नहीं होता, बल्कि यह संदेश की राजनीति भी होती है। इसलिए उम्मीदवार चयन को लेकर हर दल बेहद सावधानी बरत रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह चुनाव सभी दलों के लिए “सेमीफाइनल” जैसा माना जा रहा है। एक ओर एनडीए अपनी एकजुटता और संख्या बल का प्रदर्शन करना चाहेगा, तो दूसरी ओर विपक्ष यह दिखाने की कोशिश करेगा कि वह अभी भी राजनीतिक लड़ाई में पूरी तरह मौजूद है। इसी कारण उम्मीदवारों की घोषणा, दलों के भीतर की लॉबिंग और अंतिम समय की राजनीतिक चालें आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा विषय बनने वाली हैं।
अब सबकी निगाह 18 जून पर है—क्या एनडीए अपनी संख्या शक्ति के बल पर लगभग क्लीन स्वीप करेगा, या विपक्ष आखिरी सीट पर कोई बड़ा राजनीतिक दांव खेलकर चुनाव को दिलचस्प बना देगा?































