
गुरुगांव DLF फेज 3 में बिहार के आदित्य राज पांडे को इसलिए मारापीटा गया क्योंकि उनके बोलने का टोन बिहारी था। पीटने वाले आदित्य पांडे के दोस्त के दोस्त ही थे, जानकार थे, लेकिन बिहार और बिहारी टोन से इतनी नफरत थी मन में की आदित्य को तब तक लात-घूसों से पीटा गया जबतक वो बेहोश नहीं हो गया।

3-4 दिन पहले इसी गुरूग्राम में रामपुकार यादव को बिहारी होने की वजह से उसके मैनेजर ने इतना शोषण किया की रामपुकार यादव जी को आत्महत्या करनी पड़ी। रामपुकार यादव जी ने अपने आत्महत्या से पहले 8 पेज का सुसाइड नोट लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है की उनका मैनेजर न केवल उनका मानसिक, शारीरिक, आर्थिक शोषण कर रहा था बल्कि उन्हें लड़की व्यवस्था करने को कह रहा था, उनको ब्लैकमेल करके उन्हें उनकी पत्नी को बिहार से लाने को मजबूर कर रहा था। वो कहता था की बिहारन औरतों की कीमत है 80000 रुपया, और हरयाणा में भैंस की कीमत है 1 लाख तीस हजार। उनको अपमानित करते हुए वो कहता था की हरियाणा के भैंस की कीमत बिहारी औरतों से 50 हजार रुपया ज्यादा है। रामपुकार जी ये सब नहीं झेल सके और आखिरकार उन्होंने आत्महत्या कर लिया।

कुछ दिन पहले बिहारी होने की वजह से दिल्ली में पांडव कुमार की हत्या की खबर आप जानते ही होंगे। दिल्ली की सरकार इस अहंकार और इगो में आ गई है की इतनी मांग और विरोध होने के बावजूद वो पांडव के परिवार को मुआवजा देने को तैयार नहीं हुई, क्योंकि उन्हें पता है की बिहारी फिर भी उनके ही पार्टी को वोट देंगे।

हम बिहारी कब जागेंगे ? हमारे नौजवान दूसरे प्रदेशों में बिहारी होने की वजह से मार खा रहे हैं, गाली खा रहे हैं, शोषण झेल रहे हैं, आत्महत्या कर रहे हैं, उनकी हत्या की जा रही है। कभी सोचिएगा की क्यों ? आपकी सरकार नहीं सोचेगी कभी ये, कम से कम आप सोचिए। ऊपर तीनों पीड़ितों की जाति अलग-अलग थी, किसी का टाइटल पांडे था, किसी का यादव और किसी का कुशवाहा। लेकिन उनपे हमला/शोषण करने वाले ने उनकी जाति नहीं बल्कि केवल उनकी बिहारी पहचान देखी। हम बिहार के अंदर जाति के ऊपर जितना फूटानी कर लें, लेकिन दूसरे प्रदेश वाले बिहारियों के प्रति पूर्ण समभाव रखते हैं, शोषण में पूर्ण बराबरी करते हैं, जाति नहीं देखते। उनके लिए सिर्फ ये मायने रखता है की आप बिहार से हैं और आप एक मजबूर शिकार हैं।































