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Hamari Aawaj Aap Tak


✍ मंजुल कुमार सिंह

बिहार के सासाराम की 17 वर्षीय नाबालिग बच्ची स्नेहा सिंह, जो वाराणसी के जवाहर नगर स्थित रामेश्वरम हॉस्टल में रहकर मेडिकल परीक्षा (Neet) की तैयारी कर रही थी, उसका 1 फरवरी 2025 को शव संदिग्ध परिस्थितियों में खिड़की से लटका मिला।

स्नेहा के परिजनों के अनुसार, स्नेहा के साथ पहले बलात्कार किया गया, फिर उसकी निर्मम हत्या कर उसके शव को खिड़की से लटका दिया गया था और उत्तर प्रदेश की योगी-मोदी की पुलिस ने साक्ष्य मिटाने के लिए आनन-फानन में पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को शव को सौंपने के बजाय डरा-धमकाकर खुद शव को जला दिया था। पुलिस ने जानबूझकर हत्या को आत्महत्या दिखाने की कोशिश की। जबकि साफ-साफ दिख रहा था कि पांव जमीन तक आसानी से पहुंच रहा था। जमीन पर खड़े- खड़े कैसे कोई फांसी पर लटक सकता है?

मोदी जी कहते हैं- ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ!’’ जबकि, उनके संसदीय क्षेत्र बनारस में बेटी सुरक्षित नहीं है तो देश के किस कोने में सुरक्षित रहेगी? पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हाथरस जैसा कांड हुआ। देश के नागरिकों को अपने बेटियों को गुंडाें से स्वयं बचाना होगा, क्योंकि अब बेटियों को बचाने की बजाय बेटियों की लाशों को जलाया जा रहा है ताकि अपराधियों को बचाया जा सके।

हालत यह है कि बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली आदि राज्यों में हत्यारों की गिरपफ़तारी और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के दबाव में यूपी महिला आयोग की सदस्य डॉ प्रियंका ने बनारस प्रशासन को पत्र लिखा, तब जाकर 9 दिनों बाद काफी जददोजहद के उपरान्त प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज हुई। नामजद रिपोर्ट होने पर भी कोई गिरफ्रतारी नहीं हुई है।

14/02/2025 वाराणसी जिला पंचायत अध्यक्षा श्रीमती पूनम मौर्य के नेतृत्व में बिहार की बेटी स्नेहा के साथ हुई घटना के विषय में वाराणसी पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल से मुलाकात किया गया। मौके पर मृतका स्नेहा के पिता सुनील सिंह से टेलीफोनिक वार्ता भी करवायीा गई। सारी वस्तुस्थिति की जानकारी के बाद कमिश्नर ने एक एस-आई-टी का गठन किया, जिसमें दो आईपीएस ऑफिसर एवं एक इंस्पेक्टर क्राइम ब्रांच को नियुक्त किया गया।

सवाल है कि –
1- अगर यह आत्महत्या थी, तो परिवार को शव क्यों नहीं सौंपा गया?
2- अगर यह हत्या थी, तो अपराधियों को बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है?
3- किसके दबाव में प्रशासन ने परिवार की अनुमति के बिना शव का अंतिम संस्कार कर दिया?

आखिर ये होते क्यों हैं बलात्कार?

रोज मीडिया में बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह सामयिक सवाल, आज समुचित उत्तर चाहता है, क्योंकि अभी भी लोग कपड़ों में बलात्कार का कारण ढूंढ़ते हैं। अक्सर, परिचर्चाओं में कहा जाता है कि- ‘जो औरतें छोटे और उत्तेजक कपड़ें पहनती हैं, अक्सर उन्हीं का रेप होता है।’ यदि ऐसा है तो, 3 साल और 6 साल की बच्चियों का रेप नहीं होना चाहिए था।

निर्भया रेपकांड में मुजरीमों के वकील का बयान आया था कि- ‘लोग को ये पता नहीं होता है कि उनके बच्चे रात के 11 बजे कहां हैं, किस हालत में हैं —और किन लोगों के साथ हैं। लोग बलात्कारियों को दोष देते हैं।’ एक सम्मानित वकील के इस तरह के बयान की हम निंदा करते हैं, अगर रात में निकलनेवाली महिलाओं के साथ रेप की संभावना बनी रहती है, तो फिर घर में सोती महिलाओं, पड़ोस में खेलती बच्चियों के साथ रेप कैसे हो जाता है?

इसी तरह कहा जाता है कि- ‘महिलाओं और लड़कियों के मादक अंग-प्रदर्शन से, रेप की घटनाओं में वृद्धि हुई है।’ अगर यह तर्क सही है, तो फिर बालकों के साथ कुकर्म क्यों होते हैं? उनके पास तो उत्तेजित करनेवाले महिला-अंग नहीं होते हैं।

बलात्कार करनेवालों के पक्ष में यह भी तर्क दिया जाता है कि- ‘काम-वासना से वशीभूत होकर लोग बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं।’ अगर यह तर्क सही है, तो फिर बलात्कार के बाद स्त्री के शरीर में रॉड, बोतल और सरिया आदि क्यों डाल दिया जाता है, आंखें क्यों फोड़ दी जाती हैं, जिन्दा जला क्यों जला दिया जाता है?

—शायद इसी लिए राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष, ललिता कुमार मंगलम ने कहा था- ‘‘देश को अब भी पुरूष चला रहे हैं। —बहुत सारे जज अब भी पुरूष हैं। —देश में बहुत कम फॉरेंसिक लैब हैं और फास्ट ट्रैक कोर्ट में जजों की संख्या कम है।’’ निर्भया की वकील, सीमा समृद्धि का मानना है कि- ‘‘देश का सत्ता-संचालन महिलाओं के हाथ में होना चाहिए।’’

नेशनल क्राइम ब्यूरो (एन-सी-आर-बी-) के अनुसार- ‘पिछले कुछ सालों में रोज औसतन, 93 से 107 महिलाओं का रेप होता है। देश में हरेक घंटे में 4 महिला बलात्कार की शिकार होती हैं —और हर 14 मिनट में 1 रेप की घटना सामने आई है। इन पीड़ित महिलाओं की औसत उम्र 18 से 30 साल के बीच होती है।

नेशनल क्राइम ब्यूरों के अनुसार- देश में हर रोज 290 बच्चे ट्रैफिकिंग, यौन शोषण, किडनैपिंग और जबरन मजदूरी जैसे अपराधों के शिकार होते हैं। एनसबी के रिपोर्ट के अनुसार- रेप की घटनाओं में 93-1 प्रतिशत आरोपी करीबी ही थे।
निर्भया केस में दरिंदों को फांसी पर चढ़वाने में अहम भूमिका निभानेवाली निर्भया की वकील सीमा समृद्धि का कहना है-

‘‘महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे हैं। फिर वह कोई जॉब हो, खेल हो, पत्रकारिता हो, राजनीति हो, कला हो, या फिर कोई अन्य काम। महिलाएं आज के समय में सशक्त बन चुकी है।’’ विदित हो कि, सीमा समृद्धि को ‘फेम इंडिया मैगजीन’ और ‘एशिया पोस्ट सर्वे’ ने 25 सशक्त महिलाओं की सूची की घोषणा की थी जिसमें सीमा समृद्धि को निर्भया केस के संदर्भ में वकालत के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाने के लिए नामित किया गया था।