
नेपाल की नदियों की पूरी ABCD
भोटे कोशी का मतलब
‘भोट’ तिब्बत का पुराना नाम है।
तिब्बत से आने वाली नदियों को भोटे कोशी कहा जाता है।
कोशी या कोसी?
दोनों नाम इस्तेमाल होते हैं।
लेकिन सही नाम ‘कोशी’ है, जो ‘कौशिकी’ से आया है।
दो प्रमुख भोटे कोशी
1. रसुवा की भोटे कोशी — इस बार बाढ़ वाली नदी
नदी का क्रम:
तिब्बत → भोटे कोशी (रसुवा) → त्रिशूली नदी → नारायणी नदी → गंडक नदी (भारत)
विवरण:
तिब्बत से निकलकर यह रसुवा जिले से बहती है।
आगे चलकर त्रिशूली बनती है।
फिर नारायणी नदी में मिलती है।
इसके बाद भारत में इसे गंडक नदी कहा जाता है।
2. सिंधुपालचोक की भोटे कोशी
नदी का क्रम:
तिब्बत → भोटे कोशी (सिंधुपालचोक) → सुन कोशी → कोशी नदी (बिहार)
विवरण:
तिब्बत से निकलकर यह सिंधुपालचोक से बहती है।
आगे चलकर सुन कोशी में मिलती है।
फिर बिहार की कोशी नदी से जुड़ती है।
पूरी नदी यात्रा — मैप के जरिए समझें
पहली धारा
भोटे कोशी (रसुवा) → त्रिशूली → नारायणी → गंडक (भारत)
दूसरी धारा
भोटे कोशी (सिंधुपालचोक) → सुन कोशी → कोशी नदी (बिहार)
कोशी नदी के पीछे क्या है मान्यता?
ब्रह्मा जी के मानस पुत्र थे राजा कुश (चंद्रवंशी राजा)।
राजा कुश के परपोते ऋषि विश्वामित्र थे। इन्हें कौशिक भी कहा जाता है।
ऋषि विश्वामित्र की बहन थीं सत्यवती (कौशिकी)।
मान्यता है कि कौशिकी पृथ्वी पर एक नदी के रूप में आई।
इसलिए इस नदी का नाम ‘कौशिकी’ पड़ा, जो आगे चलकर ‘कोशी’ कहलायी।
जरूरी बातें
नेपाल में ‘कोशी’ किसी एक नदी का नाम नहीं, बल्कि नदी के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है।
भोटे कोशी और बिहार की कोशी दो अलग-अलग नदियां हैं।
एक (रसुवा वाली) आगे चलकर गंडक बनती है, जबकि दूसरी (सिंधुपालचोक वाली) बिहार की कोशी बनती है।
इसलिए नेपाल की बाढ़ वाली भोटे कोशी और बिहार की कोशी को एक ही नदी समझना सही नहीं है।
































