Bebaak Media Network

Created with Fabric.js 5.2.4

Bebaak Media Network

Hamari Aawaj Aap Tak

अलविदा 2025, सुस्वागतम् 2026

. Jan 1, 2026................ By.Bebaak Media Network

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

वर्ष 2025 का अस्तित्व मात्र अब कैलेण्डर में कैद हो गया। मगर— अपना वजूद खोने के बाद भी यह साल अपनों से बिछड़ जाने का झटका दिल पर लगा ही गया। जिस हसीन दुनिया की तलाश में जीवन-संघर्ष करते हुए हमने हर्ष, उत्कर्ष और संतुष्टि का रंग चुनना-संजोना चाहा था। हमारा संग छोड़कर अब सन् सारणी में एक अतीत बनकर रह जायेगा — और शेष रह जायेंगे फूल-कांटे, आह-मुस्कान जो सिर्फ याद रहेंगे।

नूतन के स्वागत् में हम पुरातन को भूलना चाहते हैं जैसे खुशी के मौके पर ढलक आ रहे आंसूओं को बेरहमी से पोछना चाहते हैं। पर, —क्या अतीत को मिटाना इतना आसान है? पृथ्वी पर छाया अंधेरा तो कल सुबह के उजाले का संदेश है, पर विश्व में फैले स्याह अंधकार को दुनिया भर के सौर-नक्षत्र भी नहीं मिटा सकते।

भविष्य में सुफलों की सुप्राप्ति हेतु सुप्रयास जारी रहना चाहिए, क्योंकि बिना निराश हुए पराजय सह लेना, साहस की सबसे बड़ी परीक्षा है। अगर हम बीते दशकों का शव परीक्षण कर नया प्रतिमान स्थापित करें तो आसमान की बुलंदी भी हमारे पैरों तले आ जाए।

अगर बिहार को आने वाले 10-15 सालों में देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा होना है तो उसके लिए एक नई सोच एक नए प्रयास की जरूरत है। ये नई सोच और प्रयास किसी एक व्यक्ति या दल के बस की बात नहीं है।

प्रदेश के 14 करोड़ लोगों के 78 साल के पिछड़ेपन को कोई एक व्यक्ति या दल दूर नहीं कर सकता है। इसके लिए जरूरी है कि एक नई राजनीतिक व्यवस्था बनाई जाए, जिसे बिहार के सही लोग मिलकर एक सही सोच के साथ सामूहिक प्रयास से व्यवस्था-परिवर्तन की शुरुआत करें।

बिहारी परिस्थितियों से घबराकर तुरंत आत्महत्या का फैसला नहीं लेते। लाख गरीबी, बेरोजगारी के बावजूद जीवन-त्याग की भावना उनमें कम ही पायी जाती है। यहां के लोग हर वर्ष प्राकृतिक आपदा झेलते हैं, फिर भी इनमें अदम्य जिजीविषा पायी जाती है। बिहारी जीवन से पलायन नहीं करते, भले रोजी-रोटी के लिए अपने राज्य से पलायन कर लें।

इसका उदाहरण मॉरीसस, सूरीनाम, फिजी, फ्रेंच गुयाना, गिनी, म्यांमार, ट्रिनीडाड और टोबैगो है, जहां बिहारियों ने अपना अस्तित्व ही नहीं कायम किया, बल्कि विश्व के राजनैतिक क्षितिज पर परचम लहराते हुए प्रधानमंत्री और राष्ट्राध्यक्ष पद को सुशोभित किया — और कर रहे हैं। बिहारी तमाम बाधाओं के बावजूद कड़ी प्रतिस्पर्धा से मुंह नहीं मोड़ते हैं। फिर भी, नूतन साल में बिहार में काफी-कुछ करने की जरूरत है।