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Hamari Aawaj Aap Tak

भारत में दोहरी मानसिकता क्यों ?

जो लोग इस बात को अलग रंग दे रहे हैं, उनके लिए कुछ जानकारी देता हूं कि यही राय और यही विरोध इन देशों के लिए भी करो। हिजाब पर प्रतिबंध कई देशों में है, जिनमें मुस्लिम-बहुल देश जैसे कजाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, चाड, तुर्कमेनिस्तान शामिल हैं, और यूरोप के देशों जैसे फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क में भी सार्वजनिक जगहों पर या कुछ संस्थानों में इसे प्रतिबंधित किया गया है, आमतौर पर सुरक्षा और धर्मनिरपेक्षता के कारणों से।

मुस्लिम-बहुल देश : मध्य एशिया: कजाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान (हाल ही में पूर्ण प्रतिबंध), तुर्कमेनिस्तान। अन्य देशों में अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, चाड, मोरक्को (कुछ हद तक), मिस्र (कुछ नियमों के साथ)। जबकि, ईरान जैसे देशों में हिजाब पहनना अनिवार्य है और न पहनने पर कड़ी सजा (जेल, जुर्माना) का प्रावधान है।

यूरोपीय देश : फ्रांस: स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध (2004), लेकिन विश्वविद्यालयों में नहीं। बेल्जियम, नीदरलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क, बुल्गारिया: सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने (जैसे नकाब/बुर्का) पर प्रतिबंध।

प्रतिबंध के कारण और प्रकार : कई जगहों पर सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध लगाए गए हैं। फ्रांस जैसे देशों में धर्मनिरपेक्षता (सेकुलरिज़्म) के सिद्धांत के कारण प्रतिबंध हैं। चीन के शिनजियांग क्षेत्र में प्रतिबंध।

महिला को उपभोग और हलाला की विषय-वस्तु मानने वाले लोग देखें

नीतीश कुमार ने बिहार में महिला सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (₹10,000 की सीधी सहायता), कन्या उत्थान योजना (जन्म से स्नातक तक वित्तीय सहायता), पंचायती राज और सरकारी नौकरियों में आरक्षण, और जीविका समूह (1.40 करोड़ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना) प्रमुख हैं, साथ ही शराबबंदी, दहेज प्रथा और बाल विवाह पर रोक लगाकर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया है।

प्रमुख योजनाएँ और पहल:

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना : स्वरोजगार के लिए ₹10,000 की सीधी आर्थिक सहायता, जिसके बाद ₹2 लाख तक की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान है, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।
कन्या उत्थान योजना : जन्म से लेकर स्नातक (Graduation) तक ₹94,100 की वित्तीय सहायता, जो शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है।
जीविका दीदी : विश्व बैंक की मदद से 2006 में शुरू किया गया स्वयं सहायता समूह, जिसने 1.40 करोड़ से अधिक महिलाओं को जैविक खेती, कृषि और व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाया है।
आरक्षण : पंचायत, नगर निकाय और सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35% आरक्षण लागू किया, जिससे उनकी राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी बढ़ी।
सामाजिक सुधार और सुरक्षा:
शराबबंदी : राज्य में शराबबंदी लागू की, जिससे महिलाओं को घरेलू हिंसा और गरीबी से राहत मिली और उनके घरों में खुशहाली आई।
दहेज प्रथा और बाल विवाह पर रोक : इन कुप्रथाओं को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए, जिससे समाज में महिलाओं का सम्मान बढ़ा।
महिला पुलिस : स्कूल-कॉलेज के बाहर सादे लिबास में महिला पुलिस तैनात की गई ताकि छात्राओं की सुरक्षा हो सके।
शिक्षा और अन्य प्रोत्साहन:
साइकिल और पोशाक योजना : ग्रामीण लड़कियों की शिक्षा में सुधार के लिए साइकिल और पोशाक योजनाएं लागू की गईं।
लखपति दीदी योजना : जीविका दीदियों को 60 हजार रुपये सालाना आय वाली ‘लखपति दीदी’ बनाने के लिए सर्वे और सहायता प्रदान की जा रही है।
इन सभी प्रयासों ने बिहार की महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त किया है और उन्हें समाज में एक मजबूत पहचान दिलाई है।