
सिद्धार्थ सिंह के सामने अनिल कुमार मज़बूत विकल्प दिखाई नहीं देते
बिक्रम सीट पर अनिल कुमार को कांग्रेस प्रत्याशी बनाया जाता तो मुकाबला लगभग एकतरफ़ा माना जा रहा है। सिद्धार्थ सिंह के सामने अनिल कुमार मज़बूत विकल्प दिखाई नहीं देते। ऐसे में वर्तमान विधायक की जीत काफ़ी हद तक तय मानी जा रही है, हालाँकि, मतों का अंतर पिछली बार की तुलना में कम हो सकता है।
भाजपा खेमे में भी अंदरख़ाने कुछ असंतुष्ट नेताओं की एक लॉबी है, जो वोटों में बिखराव की कोशिश कर सकती है। दूसरी ओर, महागठबंधन के भीतर भी खेल बिगाड़ने वाले नेताओं की कमी नहीं है। नतीजतन, दोनों खेमों के असंतोषजनक तत्व एक-दूसरे को संतुलित कर देंगे।
बिक्रम सीट कभी रामजनम शर्मा का गढ़ रहा है
भाजपा की ओर से बिक्रम कभी रामजनम शर्मा का गढ़ रहा है, लेकिन अब वर्तमान विधायक की किलेबंदी जारी है। भाजपा के स्तर पर आज बिक्रम विधानसभा में दावेदारी पेश करने वाले दमदार नेता दिखाई नहीं देते।
हालाँकि बिक्रम में कांग्रेस की सीट पर दावेदारी पेश करने वाले दमदार प्रत्याशियों की एक अच्छी-ख़ासी फ़ेहरिस्त है। अशोक गगन, अशुतोष जैसे नेताओं की दावेदारी सामने है, लेकिन इन सबके बीच कुशवाहा समाज से आनेवाले जिला परिषद् सदस्य नागेंद्र कुशवाहा का नाम भी चर्चा में है जिनका जनाधार व्यापक माना जाता है।
संसदीय चुनाव में पाटलिपुत्र सीट पर RJD उम्मीदवार मीसा भारती के जीत में नागेंद्र कुशवाहा ने अहम् भूमिका निभाई थी
नागेंद्र कुशवाहा ने मज़बूत जनाधार कायम कर लिया है। उनके पास कार्यकर्ताओं की मज़बूत टीम है और उनके हर गाँव में छोटे-छोटे सक्रिय पॉकेट मौजूद हैं। क्षेत्र के अधिकांश लोग किसी न किसी रूप में उनके कृतज्ञ रहे हैं। पिछले संसदीय चुनाव में पाटलिपुत्र सीट पर RJD उम्मीदवार मीसा भारती के जीत में नागेंद्र कुशवाहा ने अहम् भूमिका निभाई थी।












