
65 लाख वोटर मामले में Supreme Court ने Election Commission को दे दिया फरमान
वोट चोरी का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने जिन 65 लाख लोगों का नाम मतदाता सूची से काटा गया है उनके बारे में जानकारी देने को कहा है।
65 लाख हटाए गए मतदाताओं की सूची वेबसाइट और BLO कार्यालयों पर प्रकाशित करने का आदेश। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार वोटर लिस्ट मामले में चुनाव आयोग को अहम निर्देश दिए, जिनके पालन से विवाद सुलझ सकता है—
1.जिन 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनके नाम, पता और हटाने का कारण साफ-साफ दर्ज करते हुए पूरी लिस्ट सार्वजनिक की जाए। यह जानकारी 3 दिन के भीतर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
हर पंचायत भवन और संबंधित ब्लॉक कार्यालय में सार्वजनिक रूप से चिपकाया/प्रकाशित किया जाए, ताकि कोई भी नागरिक जाकर अपने नाम की स्थिति देख सके।
2.आधार कार्ड को भी एक वैध पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। इससे मतदाताओं के पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया आसान, तेज और अधिक भरोसेमंद होगी।
सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग पर पहला डंडा चला, ये आंशिक जीत है
सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसले में भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों की पूरी सूची सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि यह सूची निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और सभी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) कार्यालयों के बाहर प्रदर्शित की जाए। इसके साथ ही, स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर लोगों को इस सूची की जांच करने की जानकारी दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या सुधार के लिए आधार कार्ड को एक वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा। यह फैसला बिहार में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद उठे विवादों के बीच आया है, जिसमें कई लोगों ने अपनी शिकायतें दर्ज की थीं।












