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Hamari Aawaj Aap Tak

SIR पर एक शब्द नहीं कहा

24 जुलाई को नीतीश जी ने विधानसभा में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण SIR पर चर्चा के दौरान अचानक उठकर बोलना शुरू किया। सदन का नेता होने के कारण उन्हें किसी को रोककर बोलने का हक है। जब नीतीश जी बोलने उठे तब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बोल रहे थे। तेजस्वी ने अपनी बात रोक दी और नीतीश जी बोलने लगे, लेकिन उन्होंने SIR पर एक शब्द नहीं कहा। तेजस्वी को बच्चा बताने, लालू-राबड़ी राज को कोसने और 2005 से पहले पटना में शाम के बाद कोई घर से बाहर नहीं निकलता था ?

डिरेल होते मुख्यमंत्री

नीतीश कुमार जी आज फिर डिरेल हो गये। हसुंआ की शादी में खुरपी के गीत ले कर पिल पड़े। तेजस्वी यादव जी वोटर सत्यापन पर बात कर रहे थे। अचानक मुख्यमंत्री कुर्सी से उठे और शुरू हो गये। कहने लगे “20 वर्ष पहले तुम्हारी उमरवा कितनी थी। अरे सुनो न। बैइठो ! तुम्हारे पिता और माता रहे मंत्री, तब का हाल था। कुछ था ? शाम होने पर कोई घर से निकलता था…. “

नीतीश कुमार की ऐसी स्थिति देख कर दया आने लगती है। आज उनको क्या हो गया है। तेजस्वी जी के धैर्य की सराहना करनी होगी। वह अपने लिए निर्धारित समय को मुख्यमंत्री द्वारा हसोंत लेने के बावजूद कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहे थे।

लेकिन चिंता यह है कि नीतीश जी जिस मानसिक स्थिति को पहुंच गये हैं, यह राज्य की 14 करोड़ जनता की किस्मत के लिए ठीक नहीं है। उनको भ्रष्ट भूंजा पार्टी के लोग अंधेरे में रख कर बिहार चला रहे हैं। नीतीश जी महज मुहर रह गये हैं। फैसले कोई और लेता है और बता दिया जाता है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सब हो रहा है।

बिहार के लिए अफसोस है

चुनाव आयोग SIR के बहाने लाखों आदिवासी, दलित, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, मुसलमान गरीब का वोटिंग राइट छीन रहा है। इस गंभीर मसले पर पूरा बिहार लंबे समय से नीतीश से कुछ सुनना चाह रहा था। लेकिन उन्होंने सबको निराश किया।

वर्चस्व वादी मीडिया बड़ा साझीदार है

लेकिन अखबार में जो खबर छपी है, उससे ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार ने SIR के पक्ष में निर्णायक भाषण दिया है।
इस देश में लोकतंत्र, संविधान को खत्म करने, चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई,आइटी सबको गुलाम बना कर अपने राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए इस्तेमाल करने की जो परियोजना चल रही है। उसमें वर्चस्व वादी मीडिया बड़ा साझीदार है!