Bebaak Media Network

Created with Fabric.js 5.2.4

Bebaak Media Network

Hamari Aawaj Aap Tak

प्रशांत किशोर ने सिर्फ OBC को ही टारगेट किया है और साथ भाजपा ने दिया है। सम्राट चौधरी – 7वीं फेल (OBC), मुख्यमंत्री, बिहार
तेजस्वी यादव – 9वीं फेल (OBC), पूर्व उपमुख्यमंत्री, बिहार। बिहार कांग्रेस में भी आज पिछड़ा और दलित विरोधी लोग है। जिनको कांग्रेस से ज़्यदा प्रशांत और भाजपा की चिंता है। उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ बिहार में एक सवर्ण मुख्यमंत्री बनाना है।

– भले बांकीपुर में मात्र 35 प्रतिशत लोगों ने ही उपचुनाव में मतदान किया हो। यानी तीन में से दो लोगों ने मतदान न किया हो, पर प्रशांत किशोर की यह जीत, उनकी जीत से ज्यादा भाजपा की हार है। खासकर भाजपा के दो नेताओं- राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम सम्राट चौधरी की हार है।

– प्रशांत ने इस जीत से विधानसभा चुनाव, 2025 में मिली करारी हार के माइनस को एक जीत से प्लस कर दिया है। बिहार में उनकी राजनीति की दुकान को नया मोमेंटम मिल गया है।

– सम्राट जी का भाजपा की ओर से बिहार का मुख्यमंत्री बनने से अधिकांश RSS वादी सवर्ण पहले से नाराज थे। उस नाराजगी को हॉस्टल छात्रा कांड और भरत तिवारी एनकाउंटर ने सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। दूसरी तरफ बिहार में शुरू हुए एनकाउंटर के बाद से यादव बैठकी शुरू हुई थी, जिसमें सम्राट चौधरी उनके दुश्मन नम्बर एक बन चुके थे।

– प्रशांत की पॉलिटिकल स्ट्रेटजी वाली बुद्धि काम आयी और इस माहौल को समझने में वह कामयाब रहे। वह अपनी बात तो पहले भी करते ही थे, लेकिन उनको बांकीपुर उपचुनाव अपनी राजनीतिक यात्रा के लिए उम्मीद की किरण दिखी। प्रशांत ने बांकीपुर का चुनाव, वहां के मुद्दे पर नहीं, पर ऐसे मुद्दों पर ही लड़ने की कोशिश की, जो उनको भाजपा और राजद दोनों के कोर वोट दिला सके।

– मुसलमान किसी भी स्थिति में भाजपा को हारते देखना चाहते थे और यादव किसी भी स्थिति में सम्राट चौधरी की किरकिरी चाहते थे। उनके दल के नेता ने अपनी यूरोप यात्रा से अपने वोटरों को साफ संदेश दिया कि बांकीपुर में हमारी पार्टी, भाजपा को नहीं हरा सकती, तुमलोग पार्टी बदलने को स्वतंत्र हो। राजद के एक नेताजी ने बांकीपुर के राजद उम्मीदवार की जाति पर ही ज्यादा फोकस किया। यहां भी उनकी मंशा थी कि उस जाति के बहाने भाजपा का कुछ वोट कम किया जाय।

– तेजस्वी यादव ने भले अपने मुख्य राजनीतिक दुश्मन को मात देने की रणनीति के तहत बांकीपुर में ढिलाई बरती हो, लेकिन प्रशांत की जीत भाजपा से अधिक राजद के लिए नुकसानदायक सिद्ध होगा। भाजपा के लिए व्यक्ति कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा, उसको अपने विचार और एजेंडे से मतलब रहा है। वह कालांतर में कांटे से कांटा निकालते रहे हैं। प्रशांत इतना बड़ा बतोलेबाज है कि विपक्ष के स्पेस में तेजस्वी कभी दिखे तो गनीमत होगी।

– भाजपा ने भी बांकीपुर के मिजाज को हल्के में लिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बिना जांचे-परखे अपने पॉकेट के आदमी ऐसे युवा को उम्मीदवार बना दिया, जो ठीक से अपनी बात नहीं रख पा रहा था। यहां प्रशांत की वह बात लोगों को धंसी कि भाजपा कहती है कि बांकीपुर में किसी कुत्ता-बिलाई को भी उम्मीदवार बना देंगे तो वह जीत जायेगा।

– भाजपा ने स्टार प्रचारकों को जमीन पर उतार दिया। उनकी सभा में हूटिंग के वीडियो भी आये। यह स्पष्ट संदेश था कि बांकीपुर में भाजपा के खिलाफ एक वोकल नेरेटिव बन चुका है।

– इस हार में सम्राट सरकार के एक फैसले की भी अहम भूमिका रही है। वह है मॉडल स्कूल का नाम – ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ रखना और उसका रंग-रोगन भगवा करना। इससे जो जदयू के समर्थक वोटर रहे, पिछड़े/अति पिछड़े/दलित वोटर रहे, उनको सम्राट सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में RSS के एजेंडे को थोपने की झलक दिखी। यानी सम्राट जी सवर्णों से भी गये और पिछड़े-अतिपिछड़े-दलित की नजर में RSS के एजेंडे को बढ़ाने वाले सीएम बन गये। नीतीश जी लाख भाजपा के साथ रहे, लेकिन RSS के एजेंडे को सीधे-सीधे बढ़ाते नहीं दिखे। यह मैसेज नहीं फैलता तो सबके बावजूद भाजपा जीत सकती थी।

– कुल मिलाकर इस चुनाव से मैसेज आया कि सवर्ण भाजपा के बंधुआ नहीं हैं। वैसे भी होशियार लोग किसी के बंधुआ नहीं होते। वहीं, यादव और मुसलमान राजद के बंधुआ नहीं हैं। प्रशांत की इस जीत से बिहार भाजपा के भी कई बड़े नेता भीतर ही भीतर प्रफुल्लित होंगे।

– सम्राट जी के लिए संदेश स्पष्ट है कि आप अपनी जाति, पिछड़े, अतिपिछड़ों और दलितों की राजनीति की वजह से बिहार के मुख्यमंत्री हैं। वरना 70 सवर्ण विधायकों वाले NDA से आपका सीएम बन पाना संभव नहीं होता। निश्चित छोड़ कर अनिश्चित को खुश करने में लगे रहेंगे, तो बांकीपुर जैसे परिणाम आगे भी आते रहेंगे।