नीतीश कुमार की राजनैतिक कौशल के आगे एक बार फिर चित हो गये चाणक्य। सीएम बनने की धराशयी मंशा के बाद सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का बयान दिया। नीतीश कुमार ने पोस्टर जारी कर एलान किया कि बिहार में सिर्फ नीतीश कुमार

भाजपा और हम के कुल 84 विधायकों के साथ जदयू के 19 विधायकों की सहमति से आँकड़ा 103 पर आकर फँस गया। जबकि बहुमत लाइन 122 है
जब लालू प्रसाद ने जदयू की सरकार को एक बार फिर समर्थन देने और नीतीश कुमार को सीएम मानने पर सहमति दे दी तो अमित शाह की चाणक्य नीति विफल हो गई। भाजपा और हम के कुल 84 विधायकों के साथ जदयू के 19 विधायकों की सहमति से आँकड़ा 103 पर आकर फँस गया। जनता दल यू के शेष 26 विधायक नीतीश कुमार के साथ बने रहने पर तैयार थे।
राजद की नीतीश कुमार के साथ सहमति और भाजपा के पास बहुमत के जुगाड़ की कमी के मद्देनज़र मंत्री बनने को लालायित जदयू के 19 विधायकों ने भी भाजपा के साथ जाने से इंकार कर दिया। फिर भाजपा के बयान पलटने लगे और सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकारा।
भाजपा और हम के कुल 84 विधायकों के साथ भाजपा को और 38 विधायकों की जरूरत थी
ताजपोशी को लालायित सम्राट चौधरी को 18 विधायकों के लाले पड़ गये, क्योंकि दिल्ली में बैठे जदयू सांसद सिर्फ 19 विधायकों को भाजपा में लाने पर सहमत कर पाये। इन उन्नीस विधायकों ने भी भाजपा के कमजोर संख्याबल को भांपते ही किनारा कर लिया। भाजपा को कुल 38 विधायकों की जरूरत थी।